कहानी एक छोटी सी सीख की हे जिसे आप को जरूर पढ़ना चाहिए hindi story for kids, इस कहानी को शुरू से लास्ट तक पढ़ें और देखे के किस तरह एक इंसान अपनी पूरी परिवार को किस्मत बदल सकता हे।
मनोहर नाम का एक लड़का था जो बहुत ही गरीब और अकेला हुआ करता था मनोहर कचड़ा बिनने का काम किया करता था मनोहर के पास खुद का घर ही नहीं था।
मनोहर के माता पिता नहीं थे मनोहर अनाथ था और शायद इस लिए ही मनोहर को दर दर भटकना बढ़ता था और ये सिल सिला बहुत समय से चल रहा था। hindi story for kids new 2026,
और समय के साथ बहुत समय निकल गया मनोहर दुनिया से बहुत अलग था सभी लोग मनोहर को पागल समझा करते थे। लेकिन सच बात तो ये थी के मनोहर जनता था।
hindi story for kids, कबाड़ी मनोहर कि कहानी।
के ये इंसान उसका पेट भरने नहीं आयेंगे क्योंकि अगर बो कचड़ा और कबाड़ा नहीं बनेगा तो बो भूखा मर जायेगा और उसे कोई रोटी का एक निवाला नहीं देने बाला इस लिए बो सब के नजर में पागल ही सही था।
मनोहर पढ़ा लिखा नहीं था इस लिए बो और काम भी नहीं कर पा रहा था इस लिए जब से उस ने होए समाल तब से कबाड़ा बिना कर अपना पेट भरता और जहां उसे लगता नहीं रात गुजार लेता ।

और एक दिन मनोहर कबाड़ा बिनने के लिए शहर के बाहर जाने लगा क्योंकि शहर के बाहर सारा कचड़ा फेंका जाता था तो मनोहर को बहा से बहुत सारा सामान मिल जाता था। इस लिए मनोहर हर दो दिन के बाद बहा जाता और बहा से जो बेचने लायक चीज होती उसे लेके आ जाता था।
और उस दिन जैसे ही मनोहर बह पर गया तो उस में देखा के एक लड़की हे जिस के पास एक छोटा सा बच्चा हे जो उसे लेके कचड़े में पड़ी हे और सो रही हे।
और तभी मनोहर ने उस लड़की से कहा तुम यहां पर क्यों पड़ी हो यहां तो बहुत तेज बदबू आ रही हे यहां से ओर कही जाओ और बहा लेट जाओ और फिर उस लड़की ने मनोहर से कहा में कहा जाऊं इस दुनिया में अब मेरा कोई नहीं रहा।
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और तभी मनोहर को उस लड़की में सारी बात बताई तो मनोहर ने उस लड़की से कहा देखो में भी अकेला हु और इस दुनिया में मेरा भी कोई नहीं हे लेकिन हम तुम को इस कचड़े के नहीं छोड़ सकते ।
अच्छा एक काम करो तुम यहां से उठ कर उस पेड़ के नीचे चलो और जब मनोहर ने उस लड़की से पूछा के तुम में कुछ खाया हे तो बो लड़की रोने लगी और बोली नहीं हम 3 दिन से भूखे हे हमे कुछ भी खाने को नहीं मिला।
और तभी बिना कुछ सोचे समझे मनोहर ने उस लड़की से कहा की यही रुको कही जाना मत में तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लता हु और तुम्हारे रहने के लिए भी कुछ जुगाड कर लूंगा।
मनोहर बहुत समय से पैसे जोड़ जोड़ के रख रहा था तो आज मनोहर में उस लड़की के लिए अपने सालों की मेहनत लगा दी और जो भी पैसे थे मनोहर ने उस लड़की के लिए खर्च कर दिए उस लड़की के लिए कपड़े और खाना और उस के लिए एक अच्छी झोपडी बनाई।
और ये सब करने के बाद जब मनोहर ने उस लड़की से कहा के अब में जा रहा हु और तभी उस लड़की में मनोहर का हाथ पकड़ लिए और कहा आप ऐसे इंसान हो जो अपनी जिंदगी में पहली बार देखा हु ।
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लेकिन हम कब तक ऐसे जी पाएंगे अब हमारा इस दुनिया में कोई नहीं हे इस बच्चे के अलावा हम कैसे जी पाएंगे और तभी मनोहर ने उस लकड़ी का हाथ पकड़ के कहा तुम टेंशन लो हम आज से तुम्हारे साथ हे।
आज से हर दिन हम आप दोनों की देखभाल करेंगे आज से खाना खाने के लिए और सारी जरूरतें हम पूरे करेंगे इतना सुन के उस लकड़ी को तसल्ली हो गई और फिर मनोहर बहा से चला आया ।
और अब से मनोहर हर दिन दूर दूर तक कबाड़ा बिनता और रोज शाम उस लकड़ी के पास पहुंच जाया करता ओर हर दिन इस तरह ही गुजर रहा था एक दिन उस लकड़ी में कहा के अब हम से और अकेला नहीं रहा जाता।
आप हम से शादी कर लो और तभी मनोहर ने उस लड़की से कहा आज हम आप से शादी कर लेगे लेकिन हम बच्चे पैदा नहीं करेंगे इस को ही बड़ा कर के पढ़ाएंगे और इसे जिंदगी जीने के लायक बनाएगी।
और फिर क्या दोनों में शादी कर ली और अब से साथ साथ रहने लगे और बहुत कम समय में मनोहर में उस छोटे से लड़के को एक बॉडिंग स्कूल में डाल दिया ओर खूब मेहनत कर के पैसा जोड़ता और अपने बच्चे को पढ़ाया लिखाया करता।
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धीरे धीरे समय निकलता गया और बो छोटा सा लड़का बड़ा होने लगा और समय के साथ मनोहर का लड़का सुनील 16 साल का हो गया और अब सुनील बह से निकल कर अच्छे स्कूल में जाने लगा लेकिन फिर भी मनोहर ने सुनील को अपने साथ न रख कर एक किराए के कमरे में रख दिया ।
सुनील नहीं से रोज स्कूल जाता और बही रहा करता था मनोहर ओर सुनील के मा की जिंदगी तो कट हो रही थी और समय के साथ मनोहर भी बीमार पड़ जाता है ये देख मनोहर की बीबी घबरा जाती हे ।
और अपने लड़के सुनील से बोलती हे के तुम पढ़ाई बंद करो और कुछ काम करो ताकि तुम्हारे पिता का अच्छे से इलाज हो ओर बो जल्दी सही हो जाए लेकिन इस से पहले कुछ हो पता मनोहर कि तबियत जायदा खराब होने के कारण उस की दुखद मौत हो जाती हे।
और इस के बाद मनोहर के लड़के सुनील को अपनी पढ़ाई छोड़ देनी पड़ती ने और फिर भी सुनील हर नहीं मानता क्योंकि सुनील ने 12 अच्छे नंबरों से पास कर लिया था।
इस लिए बो काम करता रहा उस के साथ फॉर्म भी भरता रहा और सुनील ने एक आर्मी की सरकारी नौकरी पा ली जिस के बाद सुनील ने अपनी ओर अपने मां की जिंदगी सुधार ली ।
लेकिन अगर आज मनोहर जिंदा होता तो वो बहुत खुश होता क्यूंकि ये सब कुछ उस के बिना पूरा नहीं होता सुनील ओर सुनील की मां आज भी मनोहर को बहुत याद करते हे।
दोस्तो लाइफ में कभी भी किसी भी मोड पर इंसान को हार नहीं माननी चाहिए क्योंकि इंसान की लाइफ में हार जैसा कुछ हे ही नहीं कहानी पसंद आए तो अपने बच्चों के साथ शेयर जरूर करे। hindi story for kids, कबाड़ी मनोहर कि कहानी।